सहस ने 16 वर्षीय राधा को किया सम्मानित, बने कोडरमा जिले के ब्रांड एंबेसडर

सिर्फ 16 साल की उम्र में राधा पांडेय झारखंड के कोडरमा जिले की ब्रांड एंबेसडर बनी हैं। उन्हें ये सम्मान उनके साहस की वजह से मिला है। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज बुलंद करके राधा देश की तमाम नाबालिग बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। बीते दिनों राधा ने सिर्फ 16 साल की उम्र में खुद के विवाह कराने के प्रयासों के विरुद्ध मुखर होकर आवाज़ उठाई है। उनके इस कदम की जमकर सराहना हो रही है। नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को आदर्श मानने वाली राधा कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन से जुड़ी हैं। राधा को ये साहस इसी जुड़ाव की वजह से मिला है।

राधा झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के मधुबन ग्राम पंचायत के टिकैत टोला की रहने वाली हैं। 16 वर्ष की राधा को बीते जून माह में पता चला कि उसके माता-पिता उसका विवाह पड़ोस के गांव में रहने वाले एक लड़के से 26 जून को करने वाले हैं। राधा ने विवाह करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मैं अभी 18 वर्ष की नहीं हुई हूं, ऐसे में मेरा विवाह कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन पिता ने उसकी उसकी बातों को अनसुना कर दिया। राधा ने लड़के के घरवालों को भी फोन किया। उन्हें बताया कि वो अभी आगे पढ़ना चाहती है, इसलिए शादी नहीं कर सकती है। लड़के के घर वालों ने भी राधा की बातों को नहीं सुना।

बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज बुलंद करके राधा

जब माता पिता तैयार नहीं हुए तो राधा ने कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन (केएससीएफ) को जानकारी साझा की। केएससीएफ की टीम को जैसे ही पता चला तो वे तत्काल अपनी बाल मित्र राधा के घर पहुंच गए। सबसे पहले तो टीम ने राधा के माता-पिता से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। लेकिन दोनों समझने को तैयार ही नहीं थे। आखिरकार केएससीएफ टीम ने राधा के पिता को चेतावनी दी कि अगर विवाह कार्यक्रम को रद्द नहीं किया तो पुलिस को सूचित करेंगे। इसके बाद राधा के पिता को इस बाल विवाह को रद्द करना पड़ा। टीम ने भविष्य के लिए उनसे एक लिखित वचन लिया कि वह बेटी का विवाह 18 साल की उम्र से पहले नहीं करेंगे।

राधा बताती हैं कि वे बालमित्र ग्राम टिकैत टोला की मुखिया हैं। लंबे समय से बाल पंचायत के अन्य बच्चों के संघ बाल विवाह, बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। ऐसे में वे खुद बाल विवाह कैसे कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि इस बात को मां-पिता और होने वाले ससुराल पक्ष को भी फोन करके समझाया लेकिन वो नहीं माने। तब कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन से जानकारी साझा की। इस पर फाउंडेशन ने माता पिता से बातचीत कर इस बाल विवाह को रद्द करवाया।

दरअसल बाल मित्र ग्राम नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की अनूठी पहल है। इसे कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन द्वारा संचालित किया जाता है। बाल मित्र ग्राम का मतलब ऐसे गांवों से है जिनके सभी बच्चे बालश्रम से मुक्त हों और वे स्कूल जाते हों। हर एक बीएमजी में एक चुनी हुई बाल पंचायत होती है, जिन्हें ग्राम पंचायत मान्यता देती है। ऐसे गांवों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाती है। बाल पंचायत के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता के गुण विकसित करने का प्रयास किया जाता है। राधा इसी की एक मिसाल है। बीएमजी के बच्चे पंचायत के सहयोग से गांव की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करते हैं और उसके विकास में अपना सहयोग भी देते हैं।

डीसी ने राधा को बनाया जिले का ब्रांड अंबेसडर

नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कोडरमा जिले के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर से वार्ता की और राधा के साहस से परिचित कराया। इससे प्रभावित तत्कालीन डीसी राधा के घर गए। उन्होंने राधा का सम्मान करते हुए उसे जिले का ब्रांड अंबेसडर बनाने का ऐलान किया। पढ़ाई के प्रति रुझान को देखते हुए झारखंड सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत दो हजार राशि का स्वीकृति पत्र प्रदान किया। ये 18 साल पूरा होने तक हर माह मिलेगा। राधा के पिता पेंशन का लाभ व परिवार को राशनकार्ड से जोड़ा जाएगा। साथ ही डीसी ने राधा को सुकन्या योजना का लाभ देने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित किया।

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