गौतमबुद्धनगर पुलिस लाइन की 25 महिलाओं को मिला रोजगार आकांक्षा सिंह

गौतमबुद्ध नगर जिले की पुलिस लाइंस की महिलाओं को रोजगार दिलाने की मुहिम में अब एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। पुलिस लाइंस की 25 महिलाओं को उनकी पहली सैलरी मिल गई है। महिलाओं को उनकी मेहनत का मेहनताना दिलाने में नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह की पत्नी आकांक्षा सिंह की बड़ी भूमिका है।

गौतमबुद्ध नगर जिले की पुलिस लाइंस में लगा सोलर चरखा 25 महिलाओं की जिंदगी को रोजगार की खुशनुमा रोशनी से रोशन कर रहा है। सोलर चरखे से जिंदगी रोशन करने की योजना की शुरुआत का श्रेय नोएडा पुलिस कमिश्नर की पत्नी आकांक्षा सिंह को जाता है।

आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्किल बढ़ाने की योजनाओं

कोरोना काल में आकांक्षा सिंह ने पुलिस लाइंस की पुलिस परिवार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्किल बढ़ाने की योजनाओं पर काम शुरू किया। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना में नोएडा रेडीमेड कपड़ों के लिए जाना जाता है। ऐसे में आकांक्षा सिंह ने पुलिस लाइंस की महिलाओं को इसी फील्ड में रोजगार दिलाने की योजना बनाई। योजना सरकारी मदद से चलनी थी, ऐसे में खादी पर फोकस करने का फैसला हुआ। खादी की योजनाओं के बारे में जानकारी के सिलसिले में गाजियाबाद जिले के खादी ग्रामोद्योग अधिकारी संजय कुमार संपर्क में आए।

इस चर्चा का सुखद नतीजा निकला। महिलाओं के लिए सोलर चरखा यूनिट लगाया जाए। प्रोजेक्ट की लागत अधिक थी। ऐसे में संजय कुमार ने उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग के सचिव नवनीत सहगल से इस प्रोजेक्ट की चर्चा की। पुलिस लाइंस में ही घर के एकदम पास रोजगार के इस प्रोजेक्ट में नवनीत सहगल ने खासी रुचि ली। नतीजा, इस प्रोजेक्ट के लिए सरकारी योजना के तहत 11 लाख का सोलर चरखा लगाने की मंजूरी मिल गई।

गौतम बुद्ध नगर के पुलिस लाइंस की महिलाओं को रोजगार दिलाने की मुहिम आकांक्षा सिंह ने शुरू की। मदद राज्य सरकार से मिली। मेहनत महिलाओं ने की। नतीजा 25 महिलाओं को उनका पहला मेहनताना मिला।

मंजूरी मिली और सोलर चरखा लगा तो ट्रेनिंग शुरू हुई। सोलर चरखा से सूत कातने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पुलिस लाइंस की पुलिस परिवार की कई महिलाओं ने रुचि दिखाई। पहले चरण में 25 महिलाओं का चयन हुआ। इन्हें ट्रेनिंग दी गई।

लेकिन रोजगार तो तभी मिलेगा तब ऑर्डर मिलेगा। तो खादी विभाग ने इस सेंटर को बायबैक सपोर्ट भी दिया। इसके तहत खादी विभाग में पंजीकृत संस्था ग्राम विकास सेवा संस्थान से कच्चा माल देने की व्यवस्था कराई कई। एजेंसी सेंटर को कच्चा माल देती है। धागा बनने के बाद वही एजेंसी इसकी खरीद भी करती है। इस प्रोजेक्ट के तहत पहला ऑर्डर पूरा हो चुका है। करीब 20 दिन में सेंटर की महिलाओं को 70 हजार की आय हुई है।

हाथ से चलाए जाने वाले चरखा की तुलना में सोलर चरखा से प्रोडक्शन तीन से चार गुना बढ़ जाता है। ज्यादा उत्पाद तो ज्यादा आय। 

इस प्रोजेक्ट की सबसे अच्छी बात ये है कि रोजगार के लिए महिलाओं को पुलिस लाइंस से बाहर नहीं जाना पड़ता। घर का काम-काज जल्दी निपटाकर वे सेंटर पर आ जाती हैं। सेंटर सुबह 10 से 5 बजे तक खुलता है। लेकिन यहां प्राइवेट कंपनियों जैसे इन-आउट की बाध्यता नहीं है। ऐसे में महिलाएं घर के कामकाज जल्दी निपटाकर सुविधा के मुताबिक काम के लिए आ सकती हैं। वैसे भी महिलाएं जितना ज्यादा सूत कातेगी। उतना ज्यादा तनख्वाह बनेगी। पुलिस लाइंस कैंपस में सेंटर होने का फायदा ये भी है कि महिलाओं को आने-जाने में वक्त जाया नहीं होता।

पूरे प्रोजेक्ट की सफलता की सूत्रधार आकांक्षा सिंह हैं। उन्होंने प्रोजेक्ट की परिकल्पना से लेकर पुलिस लाइंस में जगह दिलाने समेत तमाम औपचारिकताएं पूरी कराने में बड़ी भूमिका रही। महिलाओं को प्रेरित किया। अब भी हर रोज प्रोजेक्ट की पूरी मॉनिटरिंग करती हैं। घर की जिम्मेदारियों से वक्त निकालकर हर रोज यहां आती हैं। छोटी-छोटी परेशानियों पर भी बारीक नजर रखती हैं। संजय कुमार बताते हैं कि हमारा विभाग तो हफ्ते में एकाध बार ही सेंटर पहुंच पाता है या फिर किसी समस्या के समाधान के लिए पहुंचता है। लेकिन महिलाओं में हित में आकांक्षा सिंह का ये डेडिकेशन वास्तव में प्रेरणादायक है।

एक किलो धागे से पांच-सवा पांच मीटर कपड़ा बन जाता है। महिलाएं सात-आठ हजार रुपये महीने कमा सकती हैं।

 – संजय कुमार, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी, गाजियाबाद  

अभी इस सेंटर पर सिर्फ धागा बन रहा है। लेकिन दूसरे चरण में कपड़ा बुनाई के लिए लूम लगाने की योजना है। तीसरे चरण में यहां तैयार कपड़ों से सिलाई भी होगी। कोरोनाकाल में पुलिस लाइंस में महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया था। इन महिलाओं के पास सिलाई मशीन भी है। ऐसे में डिजाइनर के मार्गनिर्देशन में यहां कपड़े तैयार करना आसान होगा।

आकांक्षा सिंह का पुलिस परिवार की महिलाओं से दिली लगाव है। उनके प्रयास सिर्फ रोजगार दिलाने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि वे पुलिस परिवार की महिलाओं के रोजमर्रा के सुख-दुख की भी भागीदार हैं। ये आकांक्षा सिंह का कुशल व्यवहार है कि पुलिस लाइंस की महिलाएं उनसे सुख दुख साझा करने में संकोच नहीं करती हैं। पुलिस कमिश्नर की पत्नी उनके परिवार के मुखिया के तौर पर जरूरत पड़ने पर हमेशा इनके बीच मौजूद रहती हैं।

और पढ़े:

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post