20 लाख सैनिटरी पैड बांटकर 17 राज्यों में महिलाओं की ‘संगिनी सहेली’ बनी प्रियल भारद्वाज

मासिक धर्म, हर माह महिलाओं को होने वाली एक साधारण प्राकृतिक क्रिया है। जानकारी के अभाव में सावधानी नहीं बरतने की वजह से कई बार मासिक धर्म महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। लेकिन जहां समस्या है वहीं समाधान भी है। अशिक्षित महिलाओं व लड़कियों के लिए आशा की किरण बन कर सामने आई हैं, संगिनी सहेली संस्था की फाउंडर प्रियल भारद्वाज। वैसे तो पेशे से वे फैशन डिजाइनर हैं। लेकिन लंबे समय से देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रियल भारद्वाज संचालित संस्था संगिनी सहेली गरीब, मजदूर तबके की महिलाओं को मासिक धर्म के समय स्वास्थ्य-सुरक्षा एवं स्वच्छता के प्रति जागरुक बना रही हैं।

संगिनी सहेली 17 से अधिक राज्यों में काम कर रही है। ग्रामीण इलाकों व मलिन बस्तियों में जरूरतमंद महिलाओं को निशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध करवा रही है। मकसद सिर्फ एक है कि गरीबी और अशिक्षा से जूझ रही महिलाओं और बच्चियों को निःशुल्क साफ़ सुथरे सैनिटरी पैड मुहैया कराए जाएं। माहवारी के विषय में जागरुक किया जाए। संगिनी सहेली के जरिए प्रियल भारद्वाज लगातार प्रयासरत हैं। अब तक उनकी संस्था देशभर में 20 लाख से अधिक सैनेटरी नैपकिन का निःशुल्क वितरण कर चुकी है।

“माहवारी अभिशाप नहीं, बल्कि प्राकृतिक देन है। ये हर महिला के जीवनकाल का एक हिस्सा है। इस विषय पर समाज को जागरूक करना बेहद जरुरी है।” -प्रियल भारद्वाज

संगिनी सहेली के इस सफर की शुरुआत 2020 में तब हुई जब देश में पहला लॉकडाउन लगा। देश की राजधानी दिल्ली से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे थे। प्रियल अपनी टीम के साथ इन प्रवासियों की मदद में लग गई। राहत सामग्री बांटने वक्त एक दिन एक लड़की ने उनके पास आयी। झिझकते हुए उसने कहा, दीदी आप हमें खाने-पीने की चीजें दे रही हैं। लेकिन हमें इस समय सैनिटरी पैड की सख्त जरूरत है।

प्रियल ने जब दूसरी प्रवासी महिलाओं से बात की। तब उन्हें पता चला कि ये तो बहुत बड़ी समस्या है। साथ ही वे इस हकीकत से भी रूबरू हुईं कि ये समस्या सिर्फ पलायन के दौरान ही नहीं है। बल्कि खासकर गरीब तबके की महिलाओं में ये आम समस्या है। जागरुकता या फिर धन के अभाव में गंदा कपड़ा इस्तेमाल करना उनकी मजबूरी बन गई है। इस वाकये के बाद प्रियल को एक नया मकसद मिल जाए। सबसे पहले तो प्रवासी महिलाओं के राहत सामग्री के साथ सैनिटरी नैपकिन बांटना शुरू किया।

लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन के दौरान मार्ग में राहत सामग्री के वितरण करने से शुरुआत करने वाली प्रियल भरद्वाज ने उसके बाद संगिनी सहेली के जरिए गरीब महिलाओं की सहायता के लिए कमर कस लिया। दोस्तों के साथ शुरू संगिनी सहेली का ये कारवां कुछ इस कदर आगे बढ़ा कि देश भर से खुद ब खुद लोग जुड़ते चले गए। आज देश भर से प्रशासनिक सेवा के अलावा अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोग लगातार संगिनी सहेली से जुड़ रहे हैं।

“संगिनी सहेली राष्ट्र की सभी महिलाओं की सहेली है। मासिक धर्म पर जागरुकता की इस पहल को देश के हरेक कोने में पहुंचाने का संकल्प है।” -प्रियल भारद्वाज

बदलता इंडिया से बातचीत में प्रियल भारद्वाज बताती हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों में सैनिटरी पैड्स के वितरण के दौरान हमने देखा कि करीब 25 फीसदी महिलाओं को मासिक धर्म उत्पादों का कोई ज्ञान नहीं था। मुझे जल्द ही अहसास हो गया कि सिर्फ पैड के कुछ पैकेट मुहैया कराने से स्थिति सुधरने वाली नहीं। इसके बाद हमने वितरण के साथ जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया।

इसके बाद से ही संगिनी सहेली देश के विभिन्न विभिन्न इलाकों में जरूरतमंद महिलाओं को निशुल्क सैनेटरी पैड वितरित करने के साथ ही माहवारी को लेकर जागरूकता अभियान चला रही हैं। 17 से अधिक राज्यों के दर्जनों शहरों और गांवों में हर महीने गरीब तबके की जरूरतमंद महिलाओं को संगिनी सहेली ने निःशुल्क सैनिटरी पैड बांटने का अभियान छेड़ रखा है। संस्था के जरिए दिल्ली व उसके आस-पास के राज्यों के दर्जनों जेलों में बंद महिला कैदियों तक निःशुल्क सेनेटरी पैड्स पहुंच रहा है।

अब तक 20 लाख से अधिक सैनिटरी पैड बांट चुकी प्रियल भारद्वाज कहती हैं कि संगिनी सहेली का उद्देश्य सिर्फ निशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना ही नहीं है। बल्कि देशभर में ब्लॉक स्तर पर निःशुल्क सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगवाना है। साथ ही स्थानीय महिलाओं को इसे बनाने के लिए प्रशिक्षित करना भी है। ताकि कम से कम लागत में गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी पैड्स मिले, साथ ही कुछ महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन सकें।

प्रियल भारद्वाज के इन प्रयासों का सुखद परिणाम है कि उत्तर प्रदेश का मथुरा जिला देश का पहला शत-प्रतिशत सैनेटरी पैड इस्तेमाल करने वाला जिला बन चुका है। इसमें संगिनी सहेली परिवार के साथ ही मथुरा जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की भूमिका भी सराहनीय है।

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