दिल्ली में आ गए दुनिया के सात अजूबे

दुनिया के 7 अजूबों के दीदार के लिए अब आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि धातु के कबाड़ को इस्तेमाल करते हुए इन सात अजूबों की नक़ल राजधानी दिल्ली में तैयार की गई है।

दुनिया का आठवां अजूबा कौन सा है?

मनीष कुमार गुप्ता: हम में से काफी लोगों ने दुनिया के सात अजूबों जैसे मिस्र के पिरामिड, पेरिस का एफिल टावर, पीसा की झुकी हुई मीनार, आगरा का ताजमहल आदि को नजदीक से देखने की हसरत की होगी और आपकी यह हसरत पूरी करने के लिए इन्हीं अजूबों के प्रतिरूप अब दिल्ली में बना दिए गए है। यह ठीक उसी तरह बने हैं जैसे राजस्थान के कोटा शहर में बनाये गए हैं। लेकिन दिल्ली की ये प्रतिकृतियां एक नयापन लिए हुए हैं, जिसमें ये सारी आपको एक रंग में रंगी धातु से बने मिलेंगे। फिर चाहे आजकल चलन में आई विवाह से पहले की मुलाकातों की शार्ट फिल्म बनाना हो, सामाजिक या परिवारिक मस्ती की मुलाकातें हों, फिल्मों की शूटिंग हो, पिकनिक का अड्डा, यह स्थान बच्चे, युवा, प्रौढ़ एवं वृद्ध सभी के लिए एक मुफीद जगह साबित होगी। अगर पर्यटन एक इश्क है तो वेस्ट टू वंडर पार्क उसका नया इबादतगाह है।

ताजमहल:-

यहां मोहब्बत की इमारत ताजमहल है, सम्मान में झुकती पीसा की मीनार, बुलंद इरादों के सम्मान बुलंद अमेरिका का स्टैच्चू ऑफ लिबर्टी भी है। यहीं आपको इटली के प्राचीन खूनी खेलों व मनोरंजन की दास्तान यानि रोम का कॉलेजियम भी मिलेगा।

दुनिया के 7 अजूबों के दीदार के लिए अब आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि धातु के कबाड़ को इस्तेमाल करते हुए इन सात अजूबों की नक़ल राजधानी दिल्ली में तैयार की गई है। जिसके लिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए एक बेहद खूबसूरत पार्क बनाया गया है और ये कलाकृतियां इस पार्क में रखी गई हैं। ये असल इमारत से भले ही छोटी हैं लेकिन आपको मस्ती और रोमांच पूरा मिलेगा। शाम में जब इन अजूबों के अंदर लगी हुई एलईडी लाइटें जगमगाती रोशनियों का नूर बन कर इन इमारतों के छोटे हिस्सों से फूटते हुए बाहर छन-छन कर निकलता है तो वातावरण में एक अलग ही सौंदर्य मानो दिलों में छा जाता है।

वेस्ट टू वंडर पार्क:-

वेस्ट टू वंडर पार्क  का उद्घाटन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने फरवरी 2019 में किया है। यह पार्क सराय काले खां क्षेत्र में सात एकड़ में फैला हुआ है।

इस पार्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रखे सभी 7 अजूबों के प्रतिरूप विभिन्न तरह के धातुओं के लगभग 150 टन ऑटोमोबाइल कचरे, पंखों, छड़ी, लोहे की चादरें, नट-बोल्ट, साइकिल और मोटरसाइकिल सहित कई अन्य कचरे का इस्तेमाल करके वेस्ट टू वंडर शब्द को चरितार्थ कर दिया है। रेहड़ी, झूले, बेयरिंग, रेलिंग, पोल जैसे खराब हो चुके उपकरण और पुराने हो चुके उत्पादों से सात अजूबों के प्रतिरूपों को इको-फ्रेंडली व जैविक सामग्री से इसको सजाया गया हैं और इस पार्क के लिए आवश्यक ऊर्जा स्वयं का सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन है।

एफिल टॉवर:-

पार्क में 60 फुट के एफिल टॉवर और 20 फुट के ताजमहल सहित दुनिया के सात आश्चर्यों की प्रतिकृति बनाई गई है और सभी अजूबे कबाड़ से ही तैयार किए गए हैं।

इस पार्क को देखना बेहद सुविधाजनक है, क्योंकि इसके लिए आने वाले लोगों को मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और मेट्रो स्टेशन आदि सभी कुछ नजदीक ही है। इस पार्क व सातों प्रतिकृतियों का निर्माण दिल्ली की साउथ एमसीडी ने किया गया है। यह पार्क राजीव गांधी स्मृति वन और सराय काले खां ISBT के बीच में रिंग रोड पर स्थित है। यहां वयस्कों से 50 रुपये का प्रवेश शुल्क, जबकि 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए 25 रुपये का टिकट होगा। 65 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों के लिए प्रवेश शुल्क नहीं होगा। ये पार्क देर रात 11 बजे तक खुला रहेगा। ये पार्क जितना खूबसूरत दिन में दिखता है उससे कई गुना ज़्यादा खूबसूरती रात में नज़र आती है। वेस्ट टू वंडर पार्क अपनी व्यापकता, भव्यता, सुंदरता के साथ-साथ इन प्रतिकृतियों के पुरातन ऐतिहासिक महत्व के कारण दिल्ली की नई पहचान बना रहा है और शाम को जुट रही भारी भीड़ मानो कहती है कि आने वाले समय यह दिल्ली का एक बड़ा टूरिस्ट प्वाइंट बन कर उभरेगा।

लेखक पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है, इतिहास में जबरदस्त रूचि है। घुमक्कड़ी इनका खास शौक है।

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