सिविल सेवा में सेलेक्शन के बाद भी छात्रों को सफलता का मंत्र बांट रहे पति-पत्नी

सिविल सर्विसेज सेवा में सफलता हासिल करने के दौरान मिले सबक को जरुरतमंद अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की मुहिम में जुटा है एक दंपति। पत्नी डॉ. तनु जैन और पति वात्सल्य कुमार का मकसद सिविल सेवा की तैयारी कर रहे या करने को इच्छुक अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करना है। पति-पत्नी दोनों 2015 बैच के अफसर हैं।

देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी “सिविल सेवा” की तैयारी वालों के हजार सवाल होते हैं। मसलन मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है? मैं दिल्ली आकर नहीं पढ़ सकता? मैं अकेले नहीं पढ़ सकता? क्या मुझे नोट्स बनाना चाहिए? मुझे अमुक विषय के लिए क्या पढ़ना है? ये बहुत छोटे-छोटे सवाल हैं। लेकिन कई बार ऐसा ही कोई छोटा सवाल किसी प्रतिभाशाली अभ्यर्थी की राह का रोड़ा बन जाता है।

तैयारी करने वालों को इन छोटे-छोटे सवालों का जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सही मार्गदर्शन की कमी सफलता की राह में बाधा बन जाता है। सिविल सेवा की तैयारी करने वालों की मुश्किलें कम करने और उनके छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सवालों को जवाब देने के लिए 2015 बैच की सिविल सेवा की अधिकारी तनु जैन और उनके पति वात्सल्य कुमार ने एक 408 पेज की किताब लिख दी। किताब 2019 में प्रकाशित हुई।

कौन हैं डॉ. तनु जैन IAS?

दांतों की डॉक्टर यानी डेंटिस्ट तनु जैन और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के वात्सल्य कुमार साल 2015 में सिविल सर्विसेज के लिए चुने गए। सेलेक्शन के बाद रिश्तेदारों, जानकारों और उनके बच्चों के सैकड़ों सवाल का सामना करना पड़ा। मसलन कैसे तैयारी करें? कौन सी किताबें पढ़े? कब से तैयारी शुरू करें? इनके अलावा भी दोनों को राजधानी दिल्ली में तैयारी करने वाले कई अभ्यर्थी मिलते थे। बार-बार वही सवाल घूम कर सामने आ जाते। इस पर दोनों ने तय किया कि इन सवालों के जवाबों को किताब की शक्ल दी जाए।

ये तय होने के बाद सवाल जुटाने की कठिन कवायद शुरू हुई। सबसे पहले तो तैयारी करने वालों के सवाल को इकट्ठा किया। इसके अलावा दोनों ने सिविल सेवा में कामयाबी हासिल करने वाले अपने साथियों से भी बात की। उनसे जाना कि आखिर उनके पास कैसे सवाल आते हैं? बहुत सारे सवाल जब इकट्ठा हो गए तब जवाब तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। आखिर जवाब तैयार करना कितना आसान या मुश्किल था? तनु जैन बताती हैं कि जवाब तैयार करते वक्त ये ध्यान रखा कि हर अभ्यर्थी के हालात, पढ़ने की क्षमता, पढ़ने की गति सब एक जैसी नहीं होती। तो कोई भी सलाह अमिट या पत्थर की लकीर नहीं होनी चाहिए।

तनु जैन ने खुद तैयारी के दौरान कभी नोट्स नहीं बनाए। उनका कहना है कि हो सकता है कि कुछ लोगों ने बिना नोट्स बनाएं सफलता हासिल की हो। लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो बिना नोट्स के पढ़ ही नहीं सकते हैं। ऐसे में हर शख्स को अपनी काबिलियत और क्षमता की पहचान कर उसी के अनुरूप तैयारी करनी चाहिए। तनु बताती है कि साल …. में किताब प्रकाशित होकर आयी। ये किताब अभ्यर्थियों के करीब-करीब सभी सवालों का जवाब देती है। तनु बताती हैं कि बदलते वक्त के मुताबिक इस किताब को लगातार अपडेट करने की भी योजना है।

सिविल सेवा की तैयारी करने वालों के सवालों का जवाब तनु और वात्सल्य की किताब में है। लेकिन जब ये किताब नहीं आयी थी और दोनों ने सफलता हासिल की थी, तब सवाल पूछने वाले बहुत सारे लोग थे। ऐसे में सैकड़ों लोगों को जवाब दे पाना कैसे संभव होता था? तनु बताती हैं कि शुरुआत में तो सबको मार्गदर्शन देते थे। लेकिन बाद में लगा कि सलाह उसी को दें जिसे जरूरत हो। ऐसे में ये ध्यान रखना शुरू किया कि क्या सवाल पूछने वाला तैयारी को लेकर गंभीर है या फिर सवाल सिर्फ उत्सुकता मिटाने के लिए है। इसकी परख के लिए सवाल पूछने वाले को पहले दो-तीन किताबें पढ़ने के लिए कहते हैं। अगर सवाल पूछने वाले इन किताबों को पढ़कर वापस आते हैं तब ये स्पष्ट हो जाता है कि कि हां ये सिविल सर्विसेज परीक्षाओं को लेकर गंभीर है।

पति–पत्नी अब तक दिल्ली में आमने-सामने की बातचीत में हजारों बच्चों का मार्गदर्शन कर चुके हैं। सिविल सर्विस परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन का ये दायरा अब किताब के जरिए दिल्ली-एनसीआर की सीमा से बाहर निकलकर पूरे देश में फैल चुका है। लेकिन आज भी तनु जैन जब आमने-सामने की बातचीत में अभ्यर्थियों से मुखातिब होती हैं तो सीधे और सरल तरीके से सलाह देती हैं। जबकि उनके पति वात्सल्य कुमार की शैली अलग हैं। वे जीवंत उदाहरणों के जरिए समझाते हैं। वात्सल्य कहानियां और कविताएं भी रचते हैं। तनु बताती हैं कि वे मानते हैं कि रचने की इस कला से अभ्यर्थियों को गढ़ने में काफी मदद मिलती है।

डॉ. तनु जैन और वात्सल्य कुमार वक्त मिलने पर स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को भी प्रेरित करने का मौका नहीं छोड़ते

तनु जैन और वात्सल्य कुमार सिर्फ सिविल सेवा की तैयारी करने वालों का मार्गदर्शन ही नहीं करते बल्कि इन दोनों ने मिलकर नीतिशास्त्र पर भी एक किताब लिखी हैं। नीतिशास्त्र सिविल सर्विसेज की मुख्य परीक्षा का एक प्रमुख पेपर है। तनु बताती हैं कि नीतिशास्त्र की एक अफसर को तैयार करने की प्रक्रिया में बहुत ही अहम भूमिका होती है। इस किताब में सिविल सेवा के अलग-अलग सर्विसेज के अफसरों से चैप्टर लिखवाएं। सिविल सेवा क्रैक करने वाले इन अफसरों ने अपने-अपने चैप्टर में केस स्टडी लिखी है, जिनका अफसरों को नौकरी के दौरान सामना करना पड़ता है।

तनु और वात्सल्य ने सिर्फ सिविल सेवा की परीक्षा में सफल होकर अफसर बनने का सपने देखने वालों युवाओं की मदद के लिए सिर्फ इतना ही नहीं किया है बल्कि दोनों परीक्षा के हर स्तर के लिए कुछ ना कुछ सलाह और मार्गदर्शन देते हैं।

सिविल सेवा परीक्षा में अभ्यर्थी सबसे ज्यादा इंटरव्यू को लेकर डरते हैं। तनु जैन भी इससे अलग नहीं थी। उनके मन में भी इंटरव्यू का डर बैठा हुआ था। उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा के इंटरव्यू में कम अंक से ज्यादा अंक का सफर किया है। तनु कहती हैं कि कई सारी खूबियां हमारे व्यक्तित्व में होती हैं। लेकिन कई बार हमें पता नहीं होता। ऐसे में मेरी कोशिश है कि अभ्यर्थियों का व्यक्तित्व इंटरव्यू पैनल के सामने निखर कर आए। इसमें मदद कर सकें। इसके लिए तनु और वात्सल्य ने यू ट्यूब पर मॉक इंटरव्यू के कई वीडियो शेयर किए हैं। इनके वीडियो भी खूब देखे गए हैं। कई वीडियो को लाखों बार देखे गए हैं।

देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी सिविल सर्विसेज की परीक्षा में तनु जैन ने छह बार प्री निकाला, चार बार मुख्य परीक्षा में शामिल हुई और चार बार साक्षात्कार भी दिया। वे बेहतरीन वक्ता और मोटिवेटर भी हैं। मन के भावों को वे पेटिंग के जरिए भी व्यक्त करती हैं। पति-पत्नी दोनों कविताएं भी रचते हैं। इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियर रहे वात्सल्य कुमार ने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विसेज में सफलता हासिल की।

पति-पत्नी दोनों सिविल सर्विसेज में चयन के बाद आराम से नौकरी करते हुए जीवन बिता सकते थे। लेकिन दोनों का एक ही मकसद था कि ऐसे अभ्यर्थियों का मदद की जाए जो सिविल सर्विसेज की परीक्षा में सफलता हासिल करना चाहते हैं, लेकिन उनका कोई जानने वाला नहीं है, जो उन्हें मार्गदर्शन दे सकें। पति-पत्नी ऐसे अभ्यर्थियों की मदद कर उनकी कामयाबी का हिस्सा बनना चाहते हैं और इसीलिए नौकरी में होने के बावजूद दोनों की इस दिशा में कोशिश जारी है।

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